भोपाल में मिला दो दिन से भूखी बच्ची को दूध / आरपीएफ जवान ने भागते हुए दूध का पैकेट मां को दिया; मां ने वीडियो संदेश भेजकर आभार जताया, कहा- यही हमारे रियल हीरो

भोपाल में मिला दो दिन से भूखी बच्ची को दूध / आरपीएफ जवान ने भागते हुए दूध का पैकेट मां को दिया; मां ने वीडियो संदेश भेजकर आभार जताया, कहा- यही हमारे रियल हीरो





तीन महीने की भूखी बच्ची को भोपाल स्टेशन पर मिली मदद, मां ने शुक्रिया कहने के लिए वाट्सएप पर संदेश भेजा।






  • जवान की मदद पहुंचाने की जद्दोजहद सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई, एक हाथ में राइफल और दूसरे में दूध का पैकेट लेकर भागते नजर आया

  • तीन महीने की बेटी को माता-पिता दो दिन से पानी में बिस्किट मिलाकर खिला रहे थे, नहीं मिल रही थी कहीं से भी मदद


भोपाल. बेलगांव (कर्नाटक) से गोरखपुर जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार एक मां घर जाने की जल्दबाजी में अपनी तीन माह की बेटी के लिए दूध रखना भूल गईं। बच्ची को भूख लगी तो मां दो दिन तक पानी में बिस्किट मिलाकर खिलाती रही। दूध के बिना भूख से बिलखती बेटी के लिए हर स्टेशन पर महिला गुहार लगाती रही, लेकिन मदद उसे भोपाल आकर मिली।


ट्रेन से भोपाल पहुंची महिला साफिया हासमी की गुहार सुनकर आरपीएफ के एक जवान ने बच्ची के लिए दूध का इंतजाम किया। स्टेशन से रफ्तार पकड़ चुकी ट्रेन में मां तक दूध पहुंचाने के लिए आरपीएफ जवान ने दौड़ लगाई, तब जाकर बच्ची को दूध मिल पाया। महिला गोरखपुर की रहने वाली थी। अपने घर पहुंचकर तीन माह की बच्ची की मां साफिया मदद पहुंचाने वाले जवान इंदर यादव को शुक्रिया कहना नहीं भूली। उसने पहले सुबह जवान को मैसेज करके धन्यवाद किया। इसके बाद वीडियो संदेश भेजकर कहा- यही हमारे रियल हीरो हैं। इसके पहले महिला ने भोपाल में पदस्थ इंदर यादव का नंबर पता लगाकर संपर्क किया। 


जैसे-जैसे ट्रेन की स्पीड बढ़ रही थी, वैसे-वैसे मेरी उम्मीद कम हो रही थी


साफिया हासमी ने बताया कि वे परिवार के साथ बेलगांव में फंसी हुईं थीं। किसी तरह श्रमिक ट्रेन से गोरखपुर जाने का मौका मिला। मैं अपनी बेटी के लिए दूध रखना भूल गई। ट्रेन जब भोपाल स्टेशन पहुंची पर आरपीएफ के जवान इंदर यादव से मैंने बेटी के भूखे होने के बारे में बताया। उन्होंने मुझे जगह पर बैठने को कहा और वहां से चले गए।


इधर, ट्रेन स्टेशन से चलने लगी। जैसे-जैसे ट्रेन की स्पीड बढ़ रही थी, वैसे-वैसे मेरी उम्मीद कम होती जा रही थी। तभी खिड़की में से किसी ने दूध अंदर पहुंचाया। यह इंदर भाई ही थे। मैं तो उन्हें शुक्रिया भी नहीं कह पाई थी। दो दिन बाद मिले दूध को पीकर बेटी सुकून से सो गई। उसे सोता देख राहत मिली। इंदर भाई जैसे ही लोग असली हीरो हैं। उनकी जितनी भी तारीफ की जाए, कम है।



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