उत्तराखंड के चारधाम / बद्रीनाथ को रोज चढ़ाई जाती है बद्रीतुलसी, यहां के बामणी गांव के लोग बनाते हैं ये माला

उत्तराखंड के चारधाम / बद्रीनाथ को रोज चढ़ाई जाती है बद्रीतुलसी, यहां के बामणी गांव के लोग बनाते हैं ये माला




  • कोरोनावायरस की वजह से अभी शुरू नहीं हुई है उत्तराखंड के चारधाम की यात्रा


देशभर में कई बड़े मंदिर आम भक्तों के लिए खोल दिए गए हैं, लेकिन उत्तराखंड के चारधाम यमनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा अभी बंद ही है। बद्रीनाथ के धर्माधिकारी भुवनचंद्र उनियाल के अनुसार कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए चारधामों के सभी पुजारी, मंदिर समितियां और इस क्षेत्र के व्यापारियों ने प्रशासन से अभी यात्रा शुरू न करने की मांग की है। जिला प्रशासन ने ये बात देवस्थानम् बोर्ड तक पहुंचा दी थी। अब देवस्थानम् बोर्ड ने निर्णय लिया है कि बद्रीनाथ धाम, केदारनाथ, गंगोत्री, यमनोत्री में दूसरे प्रदेशों के भक्तों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यहां सिर्फ स्थानीय लोगों को ही दर्शन के लिए प्रवेश दिया जाएगा। ये व्यवस्था 30 जून तक रहेगी। इसके बाद ही बाहरी लोगों के लिए यहां की यात्रा शुरू हो सकती है। बद्रीनाथ देश के चार धामों में से एक है। यहां भगवान को बद्रीतुलसी विशेष रूप से अर्पित की जाती है। जानिए बद्रीतुलसी से जुड़ी खास बातें...


बद्रीनाथ को विशेष प्रिय है तुलसी


बद्रीतुलसी भगवान बदरीनाथजी को विशेष प्रिय है। मंदिर में इस तुलसी की महक फैली रहती है। ब्रह्मवैवर्तपुराण में तुलसी के संबंध में लिखा है कि-


या दृष्ट्वा निखिलाघसंघशमनी स्पृष्टा वपु: पावनी।


रोगाणामभिवन्दिता निरसनी सिक्तान्तकत्रासिनी।।


प्रत्यासतिविधायिनी भगवतः कृष्णस्य संरोपिता।


न्यस्ता तच्चरणे विमुक्तिफलदा तस्यै तुलस्यै नमः।।


ब्रह्मवैवर्तपुराण के इस श्लोक में लिखा है कि तुलसी दर्शन मात्र से ही सभी पापों का नाश हो जाता है। तुलसी स्पर्श से देह शुद्ध करने वाली, प्रणाम करने से रोगों को दूर करने वाली, जल चढ़ाने से यमराज का भय दूर करने वाली, पौधा लगाने से भगवान के समीप पहुंचाने वाली और भगवान के चरणों में अर्पित करने से मोक्ष प्रदान करने वाली तुलसी को प्रणाम है।


बामणी गांव के लोग बनाते हैं इस तुलसी का माला


बद्रीनाथ धाम में रोज तुलसी की मालाएं चढ़ाई जाती हैं। ये माला माल्या पंचायत और बामणी गांव के लोगों द्वारा बनाई जाती है। बद्रीनाथजी की आरती पवन मंद सुगंध शीतल लाइन आती है। इस लाइन में जो सुगंध शब्द की बात आई है, वह इसी बद्रीतुलसी से संबंधित है। तुलसी की महक यहां के वातावरण को पवित्र बनाती है।



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