भारत-चीन सीमा विवाद / पिछले 3-4 दिनों में पूर्वी लद्दाख सेक्टर में चीनी सेनाओं की कोई बड़ी गतिविधि नहीं नजर आईं

भारत-चीन सीमा विवाद / पिछले 3-4 दिनों में पूर्वी लद्दाख सेक्टर में चीनी सेनाओं की कोई बड़ी गतिविधि नहीं नजर आईं





लद्दाख में भारत-चीन के बीच चल रही तनातनी की पहली बार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि 6 जून को दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी इस मामले में बातचीत करेंगे। 






  • पूर्वी लद्दाख में इसी महीने कई बार भारत-चीन के सैनिक आमने-सामने आए; बातचीत से हालात संभालने की कोशिशें जारी

  • चीनी सेना द्वारा एलएसी से 100 से 150 किमी दूर अपने 10 से 12 जे-11 और जे-7 लड़ाकू विमानों को तैयार भी किया गया


नई दिल्ली. लद्दाख सीमा पर भारतीय सेना और चीन की सेना के बीच तनाव जारी है। हालांकि, इस बीच दोनों देशों की ओर से कहा गया है कि मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिशें जारी हैं। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से भी दो बार मध्यस्थता की पेशकश की गई। मगर, भारत और चीन की ओर से इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया। 


अब खबर है कि चीन की सेना की गतिविधियां एलएलसी के करीब बेहद कम हो चुकी है। यानी कोई बड़ी गतिविधि चीनी सेना की ओर से देखने को नहीं मिली है। सूत्रों ने बताया कि चीन की सेना के जवान पिछली पोजिशन के मुकाबले अब सौ यार्ड पीछे खिसक चुके हैं। इतना ही नहीं उन्होंने ऐसा कोई आक्रामक रवैया भी नहीं दिखाया है। न ही सैनिकों की संख्या में किसी तरह का इजाफा देखने को मिला है।


दोनों सेनाओं ने अपने-अपने सैनिक बढ़ाए थे


इससे पहले, चीन की ओर से एलएसी से 100 से 150 किमी दूर अपने 10 से 12 जे-11 और जे-7 लड़ाकू विमानों को तैयार रखने की सूचना मिली थी। इतना ही नहीं चीन ने सीमा पर सैनिकों की संख्या भी बढ़ा दी थी। हालांकि, इसके जवाब में भारतीय सेना ने भी संवेदनशील इलाके में सतर्कता बढ़ाई थी।


रक्षा मंत्री बोले- दोनों देशों के सैन्य अफसरों के बीच 6 जून को बैठक


लद्दाख में भारत-चीन के बीच चल रही तनातनी की पहली बार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि चीन ने पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी पर बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती की है। हालांकि, भारत ने इस हालात से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए हैं। 


राजनाथ ने आगे कहा कि सीमा विवाद के मामले में दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अफसरों के बीच 6 जून को बैठक होनी है। हालांकि, उन्होंने साफ कर दिया कि भारत फिलहाल पीछे नहीं हटेगा। 


मई में दोनों सेनाओं के बीच तीन बार झड़प हुई


भारत और चीन के सैनिकों के बीच इस महीने तीन बार झड़प हो चुकी है। इन घटनाओं पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बयान जारी करते हुए कहा था कि भारतीय सैनिक अपनी सीमा में ही गतिविधियों को अंजाम देते हैं। भारतीय सेना की लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पार एक्टिविटीज की बातें सही नहीं हैं। वास्तविकता में यह चीन की हरकतें हैं, जिनकी वजह से हमारी रेगुलर पेट्रोलिंग में रुकावट आती है।

इस महीने झड़पें कहां, कब और कैसे हुई?


1) तारीख- 5 मई, जगह- पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग झील
उस दिन शाम के वक्त इस झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-5 इलाके में भारत-चीन के करीब 200 सैनिक आमने-सामने हो गए। भारत ने चीन के सैनिकों की मौजूदगी पर ऐतराज जताया। पूरी रात टकराव के हालात बने रहे। अगले दिन तड़के दोनों तरफ के सैनिकों के बीच झड़प हो गई। बाद में दोनों तरफ के आला अफसरों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ।


2) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- उत्तरी सिक्किम में 16 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद नाकू ला सेक्टर
यहां भारत-चीन के 150 सैनिक आमने-सामने हो गए थे। आधिकारिक तौर पर इसकी तारीख सामने नहीं आई। हालांकि, द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां झड़प 9 मई को ही हुई। गश्त के दौरान आमने-सामने हुए सैनिकों ने एक-दूसरे पर मुक्कों से वार किए। इस झड़प में 10 सैनिक घायल हुए। यहां भी बाद में अफसरों ने दखल दिया। फिर झड़प रुकी। 


3) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- लद्दाख
जिस दिन उत्तरी सिक्किम में भारत-चीन के सैनिकों में झड़प हो रही थी, उसी दिन चीन ने लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अपने हेलिकॉप्टर भेजे थे। चीन के हेलिकॉप्टरों ने सीमा तो पार नहीं की, लेकिन जवाब में भारत ने लेह एयरबेस से अपने सुखोई 30 एमकेआई फाइटर प्लेन का बेड़ा और बाकी लड़ाकू विमान रवाना कर दिए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हाल के बरसों में ऐसा पहली बार हुआ जब चीन की ऐसी हरकत के जवाब में भारत ने अपने लड़ाकू विमान सीमा के पास भेजे।



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