कोरोना पर सरकार / दूसरे देशों में हर एक लाख लोगों में 62, जबकि भारत में 7.9 लोग संक्रमित मिले; हमारे यहां रिकवरी रेट 7.1% से बढ़कर 39.6% हुआ

कोरोना पर सरकार / दूसरे देशों में हर एक लाख लोगों में 62, जबकि भारत में 7.9 लोग संक्रमित मिले; हमारे यहां रिकवरी रेट 7.1% से बढ़कर 39.6% हुआ





यहां से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों को बसों से उनके घर भेजा जा रहा है। बस में बैठने से पहले सभी मजदूरों के शरीर का तापमान चेक किया गया।






  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने दी जानकारी, आईसीएमआर ने कहा- 25 लाख से ज्यादा लोगों की जांच हुई

  • लॉकडाउन का जब पहला फेज (25 मार्च) शुरू हुआ था तब रिकवरी रेट 7.1% था, आज 40% के करीब पहुंचा


नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए भारत में समय पर फैसले लिए गए। यही कारण है कि दुनिया के सबसे ज्यादा प्रभावित 15 देशों की तुलना में हमारे यहां 83% कम मौतें हुईं। पूरी दुनिया में एक लाख में 62 लोग कोरोना से प्रभावित हुए हैं तो भारत में 7.9 लोग संक्रमित मिले।


मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा, दुनिया के 15 सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की कुल आबादी 142 करोड़ है, जबकि भारत की अकेले 137 करोड़ आबादी है। इतनी अधिक आबादी होने के बावजूद भारत की तुलना में उन 15 देशों में हमसे 34 गुना ज्यादा मामले और 83 गुना ज्यादा मौतें हुईं। भारत में प्रति एक लाख आबादी पर 0.2 लोगों की मौत हुई। अब तक देश में 25 लाख 36 हजार 156 टेस्ट हो चुके हैं। पिछले दो दिन में हमने 1 लाख से ज्यादा टेस्ट किए हैं। अभी 555 लैब एक्टिव हैं। 164 लैब प्राइवेट सेक्टर से हैं। 


लॉकडाउन के चलते रिकवरी रेट में मिली बढ़त
मंत्रालय ने बताया कि लॉकडाउन के चलते संक्रमितों के ठीक होने की रफ्तार में तेजी आई है। जब देश में लॉकडाउन का ऐलान हुआ था उस दौरान 7.1% रिकवरी रेट थी। लॉकडाउन के दूसरे फेज में यह 11.2 प्रतिशत हो गई। तीसरे फेज में यह 24.3 प्रतिशत हुई और अब 40% के करीब यानी 39.6% हो गई है।


2.94% मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर


अग्रवाल ने बताया कि अभी देश में जो कोरोना के मरीज हैं उनमें 2.94% लोग ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। 3% आईसीयू और 0.45% लोग वेंटिलेटर पर हैं। आज अस्पतालों में 1.5 लाख बेड कोरोना मरीजों के लिए मौजूद है। अगर देश में आने वाले दिनों में केस बढ़ते हैं तो उसके लिए भी सरकार पूरी तरह से तैयार हैं। 


मंत्रालय ने ये भी कहा 



  • जब तक देश और दुनिया कोरोना के लिए दवा या वैक्सीन तैयार नहीं कर लेता, हम बचाव पर फोकस करेंगे। 

  • कंटेनमेंट जोन से ही हमें पता चलता है कि हम किस स्थिति में है। हमने राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे कंटेनमेंट जोन के बाहर बफर जोन बनाएं जहां पर सारी सुविधाएं मौजूद हों। 

  • हमने देखा है कि एसिम्प्टोमैटिक, माइल्ड सिम्प्टम्स वाले या सिम्प्टोमैटिक लोगों को अगर 10 दिन तक बुखार नहीं आया तो वे संक्रमण नहीं फैलाते। इसे देखते हुए हमने नई पॉलिसी बनाई है।

  • हमने समय से पहले संक्रमितों की पहचान करने की कोशिश की है। इसके अच्छे नतीजे आए हैं। काफी संख्या में लोग ठीक हुए हैं और कई लोग ठीक हो रहे हैं।



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