पेमेंट नेटवर्क / रिटेल पेमेंट सिस्टम में प्राइवेट सेक्टर शामिल हो सकता है, रिलायंस, बीएसई और एनएसई समेत कई कंपनियों ने लाइसेंस में दिलचस्पी दिखाई

पेमेंट नेटवर्क / रिटेल पेमेंट सिस्टम में प्राइवेट सेक्टर शामिल हो सकता है, रिलायंस, बीएसई और एनएसई समेत कई कंपनियों ने लाइसेंस में दिलचस्पी दिखाई




  • पेमेंट सिस्टम बिल्कुल वैसे ही होगा जैसे एनपीसीआई, यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस अर्थात यूपीआई और नेशनल ऑटोमेटेड क्लीयरिंग हाउस (NACH) को ऑपरेट करती है।पेमेंट सिस्टम बिल्कुल वैसे ही होगा जैसे एनपीसीआई, यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस अर्थात यूपीआई और नेशनल ऑटोमेटेड क्लीयरिंग हाउस (NACH) को ऑपरेट करती है।





  • फर्मों ने ड्राफ्ट के मानदंडों के तहत लाइसेंस के लिए आरबीआई के साथ शुरुआती चर्चा भी की

  • इच्छुक कंपनियों में टेक्नॉलजी, ग्लोबल फाइनेंशियल टेक और इंडियन फिनटेक के कंसोर्सियम शामिल


मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीाई) देश के बढ़ते रिटेल पेमेंट सिस्टम और गनर्वेंस में भाग लेने के लिए प्राइवेट सेक्टर को साथ लाने की कोशिश कर रहा है। इससे जुड़ने के लिए प्रमुख भारतीय कंपनियों ने रुचि दिखाई है।


आरआईएल, बीएसई, एनएसई व पेटीएम ने दिखाई दिलचस्पी


मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अनुसार, मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज, पेटीएम, स्टॉक एक्सचेंज एनएसई और बीएसई ने अपनी इच्छा जाहिर की है। इसके तहत कंपनियों को राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के बराबर पावर के साथ लाइसेंस मिलेगा। मामले से जुड़े जानकारों के मुताबिक, कंपनियों ने प्रोजेक्ट के लिए सलाहकारों की नियुक्ति कर दी है। कंपनियों ने न्यू अम्ब्रेला एंटिटी (NUE) के ड्राफ्ट के मानदंडों के तहत लाइसेंस के लिए आरबीआई के साथ शुरुआती चर्चा भी की है।


एक्सपर्टाइज और सुविधाओं पर इन कंपनियों को है भरोसा


सूत्रों के मुताबिक इन कंपनियों को लगता है कि वे विशेषज्ञता और बुनियादी सुविधाओं के आधार पर भुगतान व्यवस्था को संभाल सकते हैं और NUE से प्राप्त लाइसेंस उन्हें और अधिक स्वायत्तता और लचीलापन देने में मदद करेगा। इसके अलावा, यह कई सहयोगी उत्पादों का रास्ता खोल सकता है जो भारत के पेमेंट सिस्टम के भविष्य का निर्धारण कर सकते हैं। एक सूत्र ने कहा, "फेसबुक के साथ पार्टनरशिप में रिलायंस नियामक की मंजूरी के साथ चरणबद्ध तरीके से डिजिटल मुद्रा परियोजना लिब्रा 2.0 भी पेश कर सकती है।


देश में अगली बड़ी पेमेंट क्रांति में ये कंपनियां आगे निकल सकती हैं


इस व्यवस्था के तहत जिन कंपनियों को मंजूरी मिलती है, वे देश में अगली बड़ी पेमेंट क्रांति में आगे निकल सकती हैं। इस बाबत आरबीआई, आरआईएल और एनएसई आदि ने कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया। कई बड़ी कंपनियां लाइसेंस के लिए इच्छुक हैं। इनमें टेक्नॉलजी, ग्लोबल फाइनेंशियल टेक और इंडियन फिनटेक के कंसोर्सियम शामिल हैं। इन लोगों ने आरबीआई के समक्ष अपने आवेदन प्रस्तुत कर दिए हैं। हालांकि अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।


देश भर में एक नया पेमेंट नेटवर्क खड़ा होगा


अगर इन कंपनियों को मंजूरी दे दी जाती है तो यह पूरे देश भर में एक नए पेमेंट नेटवर्क को खड़ा कर देंगे। आगे चलकर वे खुद का पेमेंट सिस्टम लॉन्च औऱ ऑपरेट कर सकेंगे। यह बिल्कुल वैसे ही होगा जैसे एनपीसीआई, यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस अर्थात यूपीआई और नेशनल ऑटोमेटेड क्लीयरिंग हाउस (NACH) को ऑपरेट करती है।


इसे आरबीआई ही करेगा रेगुलेट


फिलहाल यह प्रस्ताव परामर्श के दौर में है और रेगुलेटर ने इसके मसौदे को साल के शुरुआत में ही पब्लिक डोमेन में रख दिया है। प्रस्तावित इकाई को आरबीआई द्वारा रेगुलेट किया जाएगा और ड्राफ्ट गाइडलाइन के अनुसार भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम (पीएसए) 2007 अर्थात Payment and Settlement Systems Act (PSSA) 2007 के तहत अधिकृत किया जाएगा। एनपीसीआई के विपरीत, लाइसेंस लेने वाली कंपनी प्रॉफिट दर्ज करने वाली एक इकाई भी हो सकती है। एनपीसीआई शीर्ष भारतीय बैंकों के कंसोर्टियम के स्वामित्व में है।


इस साल के अंत तक एक या दो लाइसेंस हो सकते हैं जारी


रेगुलेटर की योजना साल के अंत तक योग्यता और गवर्नेंस ढांचे पर अंतिम दिशा-निर्देश जारी करने की है। सूत्र ने आगे बताया कि आरबीआई आवेदनों की संख्या और प्रस्तावों की ताकत के आधार पर एक से अधिक लाइसेंस सौंप सकता है। योजना इस साल के अंत तक कम से एक-दो लाइसेंस जारी करने की है।



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