स्पेशल फ्लाइट: सरकार को फटकार / मिडिल सीट भरने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सरकार को एयरलाइंस की बजाय लोगों की सेहत की चिंता करनी चाहिए

स्पेशल फ्लाइट: सरकार को फटकार / मिडिल सीट भरने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सरकार को एयरलाइंस की बजाय लोगों की सेहत की चिंता करनी चाहिए





वंदे भारत मिशन के तहत विदेशों में फंसे भारतीयों को एयर इंडिया की उड़ानों से वापस लाया जा रहा है।






  • बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोशल डिस्टेंसिंग के लिए बीच की सीट खाली रखने के आदेश दिए थे

  • केंद्र सरकार और एयर इंडिया ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

  • सुप्रीम कोर्ट ने एयर इंडिया को सिर्फ 6 जून तक मिडिल सीट भरने की परमिशन दी


नई दिल्ली. विदेशों से भारतीयों को लाने में लगी एयर इंडिया की उड़ानों में बीच की सीट खाली रखने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अर्जेंट सुनवाई की। चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की बेंच ने इस मामले में सरकार को फटकार लगाई। अदालत ने कहा, "दो तरह के नियम नहीं चल सकते। फ्लाइट के बाहर तो आप 6 फीट की दूरी रखने की बात करते हैं, लेकिन फ्लाइट के अंदर कंधे से कंधा मिलाकर बैठने की परमिशन दे रहे हैं। सरकार को एयरलाइंस की बजाय लोगों की सेहत की चिंता करनी चाहिए।"


एयर इंडिया को 6 जून के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश मानना पड़ेगा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया को पिछले हफ्ते आदेश दिया था कि वंदे भारत मिशन के तहत विदेशों से आ रही उड़ानों में बीच की सीट खाली रखी जाए। एयर इंडिया और सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने एयर इंडिया को 6 जून तक मिडिल सीट भरने की परमिशन दे दी है, लेकिन उसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश मानना होगा।


बॉम्बे हाईकोर्ट में 2 जून को अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट से कहा है कि सभी पक्षों की राय सुनकर अंतरिम आदेश जारी करे। साथ ही एयरलाइंस को हिदायत दी कि सुरक्षा के संबंध में उन्हें हाईकोर्ट का आदेश मानना चाहिए। साथ ही कहा कि जब तक मामला कोर्ट में पेंडिंग है तब तक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) कमर्शियल सोच की बजाय लोगों की सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियमों में बदलाव कर सकता है। बॉम्बे हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 2 जून को होगी।


एयर इंडिया के पायलट ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी


पायलट देवेन कनानी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कहा था कि केंद्र सरकार के वंदे भारत मिशन के तहत विदेशों से आ रही उड़ानों में बीच की सीटें खाली नहीं रखी जा रहीं। ये डीजीसीए के 23 मार्च के सर्कुलर का उल्लंघन है। उधर, एयर इंडिया का कहना है कि वह सर्कुलर घरेलू उड़ानों के लिए था। उसे 22 मई को रिप्लेस भी किया जा चुका है।


सुप्रीम कोर्ट में बहस ऐसे चली-


सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार और एयर इंडिया का पक्ष रखते हुए कहा कि पुराना सर्कुलर सिर्फ घरेलू उड़ानों के लिए था। विदेशों से आने वालों को क्वारैंटाइन होना जरूरी है। मिडिल सीट पर नहीं बिठाने से विदेशों में फंसे कई परिवारों का प्लान बिगड़ जाएगा, क्योंकि बीच की सीट वाले मेंबर को नहीं ला पाएंगे।


सुप्रीम कोर्ट: क्या इंटरनेशनल और डोमेस्टिक फ्लाइट में कोई अंतर नहीं?


सॉलिसिटर जनरल: कोई अंतर नहीं।


सुप्रीम कोर्ट: ये कॉमन सेंस की बात है कि सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है। कोई आपको विदेशों से लोगों को लाने से नहीं रोक रहा, हाईकोर्ट ने सिर्फ बीच की सीट खाली रखने के लिए कहा था।


सॉलिसिटर जनरल: हमारे पास बहुत ज्यादा विमान नहीं हैं। बीच की सीट खाली नहीं रखने का फैसला एक्सपर्ट से बातचीत के बाद लिया गया।


सुप्रीम कोर्ट: अगर आप यात्रियों को एक-दूसरे के पास बिठाएंगे तो संक्रमण फैलेगा। हमें लोगों के स्वास्थ्य की चिंता है। हमने बॉम्बे हाईकोर्ट से अंतरिम आदेश देने के लिए कहा है।


वंदे भारत मिशन के तहत विदेशों से 30 हजार भारतीयों की वापसी
कोरोना की वजह से विदेशों में फंसे भारतीयों को लाने के लिए सरकार ने 6 मई को वंदे भारत मिशन शुरू किया था। इसके तहत एयर इंडिया के विमानों से लोग वापस लाए जा रहे हैं। इस मिशन के तहत अब तक 30 हजार लोग लौट चुके हैं।



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