सीमा विवाद / भारत का नाम लिए बगैर नेपाल ने कहा- लिपुलेख-कालापानी को वापस लेकर रहेंगे, कोई नाराज हो तो हमें फर्क नहीं पड़ता

सीमा विवाद / भारत का नाम लिए बगैर नेपाल ने कहा- लिपुलेख-कालापानी को वापस लेकर रहेंगे, कोई नाराज हो तो हमें फर्क नहीं पड़ता





नेपाल के प्रधानमंत्री मंगलवार को संसद में भाषण दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने भारत से चल रहे सीमा विवाद पर बयान दिया।



  • नेपाल लिपुलेख, कालापानी, लिंपियाधूरा पर अपना अधिकार मानता है, भारत ने नक्शे में इन्हें अपने इलाकों में दिखाया था







  • नेपाल ने ऐतराज जाहिर किया था, प्रधानमंत्री ओली ने कहा- भारत की नीति क्या है? सत्यमेव जयते या सीमामेव जयते?


नई दिल्ली/काठमांडू. नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने कहा कि तिब्बत, चीन और भारत से सटे कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधूरा को किसी भी कीमत पर वापस लाया जाएगा। प्रधानमंत्री ओली ने भारत का नाम लिए बगैर कहा कि अब हम लगातार इन इलाकों को कूटनीतिक जरिए से वापस लाने में जुटेंगे। अगर इससे कोई नाराज होता है तो हमें फर्क नहीं पड़ता। 
दो महीने पहले ओली का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है। इसके बाद वे मंगलवार को संसद पहुंचे। इस दौरान स्पीकर अग्नि सपकोटा ने उन्हें बैठकर भाषण देने की इजाजत दी। ओली नेपाल की कैबिनेट से नए राजनीतिक नक्शे को मंजूरी के बाद सीमा विवाद पर बोल रहे थे।


भारत के बयान पर ओली का जवाब- हम जो करते हैं, खुद करते हैं
इंडियन आर्मी चीफ एमएम नरवणे ने कहा था कि कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधूरा पर नेपाल के विरोध के पीछे किसी और का हाथ है। नेपाल के प्रधानमंत्री ने इस पर जवाब दिया- हम जो भी करते हैं, खुद ही करते हैं। भारत के साथ दोस्ताना संबंध रखना चाहते हैं। पर यह भी पूछना चाहता हूं कि भारत की नीति क्या है? सीमामेव जयते या सत्यमेव जयते?


ओली ने इस आरोप को भी नकारा कि जब उन्हें पार्टी में ही विद्रोह का सामना करना पड़ा था, तब चीनी राजदूत होउ यान्की ने उनकी कुर्सी बचाने में मदद की थी। ओली ने कहा, ‘‘कुछ लोग कहते हैं कि एक विदेशी राजदूत ने सत्ता में उनकी कुर्सी बचाई है। यह सरकार नेपाल के लोगों ने चुनी है और कोई भी मुझे नहीं हटा सकता।’’


भारत ने नवंबर 2019 में जारी किया था अपना नक्शा

भारत ने अपना नया राजनीतिक नक्शा 2 नवंबर 2019 को जारी किया था। इसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने सर्वेक्षण विभाग के साथ मिलकर तैयार किया है। इसमें कालापानी, लिंपियधुरा और लिपुलेख इलाके को भारतीय क्षेत्र में बताया गया है। नेपाल ने उस समय भी इस पर ऐतराज जताया था। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने सीमा से किसी प्रकार की छेड़छाड़ से इनकार किया था। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि नए नक्शे में नेपाल से सटी सीमा में बदलाव नहीं है। नक्शा भारत के संप्रभु क्षेत्र को दर्शाता है।


कब से और क्यों है विवाद?
नेपाल और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच 1816 में  एंग्लो-नेपाल युद्ध के बाद सुगौली समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इसमें काली नदी को भारत और नेपाल की पश्चिमी सीमा के तौर पर दर्शाया गया है। इसी के आधार पर नेपाल लिपुलेख और अन्य तीन क्षेत्र अपने अधिकार क्षेत्र में होने का दावा करता है। हालांकि, दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। दोनों देशों के विवादित इलाकों को अपने अधिकार क्षेत्र में दिखाते हैं।



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