Q&A / यात्राएं शुरू हो रही हैं लेकिन सैनेटाइजर साथ रखें और मास्क जरूर लगाएं इससे संक्रमण नहीं होगा और न ही इससे शरीर में CO2 बढ़ती है : एम्स डायरेक्टर 

Q&A / यात्राएं शुरू हो रही हैं लेकिन सैनेटाइजर साथ रखें और मास्क जरूर लगाएं इससे संक्रमण नहीं होगा और न ही इससे शरीर में CO2 बढ़ती है : एम्स डायरेक्टर 



 




  • एम्स डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया के मुताबिक, यात्रा में सोशल डिस्टेंसिंग ज्यादा नहीं हो पाती इसलिए सभी को मास्क लगाना जरूरी

  • देश में कोरोना से संक्रमित लोगों में स्ट्रोक, ब्रेन में ब्लीडिंग और क्लॉटिंग के लक्षण भी मिले हैं


नई दिल्ली. क्या मास्क लगाने से शरीर में ऑक्सीजन घटती है और कार्बन डाई ऑक्साइड बढ़ती है, कोरोनावायरस के नए लक्षण क्या है और क्या सैनेटाइजर से कैंसर जैसी बीमारी हो सकती है... ऐसे कई सवालों के जवाब एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने आकाशवाणी को दिए। जानिए कोरोना से जुड़े सवाल और  डॉ. रणदीप गुलेरिया के जवाब...


#1) मास्क लगाने से कार्बन डाई ऑक्साइड को दोबारा अंदर लेते हैं, इसमें कितनी सच्चाई है?
यह गलत धारणा है। हमारे शरीर के फेफड़ों में कार्बन डाई ऑक्साइड निकालने की क्षमता अधिक है। इसलिए परेशान न हो। आपके अंदर न तो ऑक्सीजन की कमी होगी और न ही कॉर्बन डाई ऑक्साइड अधिक होगी। जब भी बाहर निकलें तो मास्क जरूर लगाएं।


#2) विमान, रेल और बसें शुरू हो रही हैं, क्या सावधानी रखें?
यात्रा में सोशल डिस्टेंसिंग ज्यादा नहीं हो पाती है इसलिए सभी को मास्क लगाना जरूरी है। अगर कोई संक्रमित है और अचानक खांसता-छींकता है तो उसके वायरस बाहर नहीं जा पाएंगे। सभी मास्क लगाएं तो खतरा काफी हद तक रोका जा सकता है। यात्रा के दौरान सैनेटाइजर जरूर लेकर चलें। कहीं भी हाथ लगता है तो तुरंत सैनेटाइजर का प्रयोग करें। 


#3) सीएसआईआर में फेविपिरावर का ट्रायल चल रहा था, क्या परिणाम सामने आए?
यह एक एंटीवायरल ड्रग है, जिसका प्रयोग जापान में किया गया है। चीन से यह बात सामने आई है कि कोरोना संक्रमितों पर यह दवा असरदार है। इसलिए कुछ ट्रायल चल रहे हैं कि यह संक्रिमतों को देने पर लोग ठीक हो रहे हैं या नहीं। इसी तरह की कई दवाइयां हैं। जैसे अमेरिका में रेमडेसिवर दवा को लेकर कई बातें जर्नल में प्रकाशित हुई हैं। इस दवा से लोगों को मदद मिल रही है और लोग कम हॉस्पिटलाइज हो रहे हैं।


#4) कोरोनावायरस के नए लक्षण क्या-क्या हैं?
कोरोना के बारे में पता चल रहा है कि यह केवल निमोनिया नहीं है, इसके कई लक्षण सामने आ रहे हैं। यह शरीर के कई हिस्सों पर असर कर सकता है। कई मरीजों में बुखार के साथ डायरिया हो रहा है और खांसी, नजला जैसे लक्षण नहीं थे। कुछ नौजवान ऐसे थे जिनमे स्ट्रोक हो गया था, ब्रेन में ब्लीडिंग हो गई और क्लॉटिंग हुई। कुछ लोगों में सूंघने की क्षमता कम हो जाती है। अगर ऐसे किसी में कोई लक्षण नजर आएं तो एक बार जरूर जांच करा लें।


#5) कौन से मास्क प्रयोग करने पर सुरक्षित रहेंगे?
तीन तरह के मास्क हो सकते हैं।



  • पहला: एक कपड़े का, जो घर और बाजार में भी मिल रहे हैं लेकिन वो ऐसे होने चाहिए जिसमें से हवा बाहर न जाए। इससे वायरस के कण अंदर से बाहर नहीं जा पाएंगे और न ही अंदर से बाहर आ पाएंगे। 

  • दूसरा : ट्रिपल लेयर वाला सर्जिकल मास्क। यह उनके लिए है जो अस्पतालों में काम करते हैं। ये वे लोग हैं लेकिन संक्रमितों के सीधे सम्पर्क में नहीं रहते।

  • तीसरा : एन95 मास्क केवल कोविड-19 एरिया में काम कर रहे डॉक्टरों या आईसीयू में कार्यरत लोगों और संक्रमितों से सीधे सम्पर्क में रहने वालों के लिए है। इसलिए आम जनता को केवल कपड़े वाला मास्क लगाने के लिए कहा जा रहा है।


#6) हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन को लेकर क्या नए दिशा-निर्देश हैं?
यह दवा कई सालों से देश में प्रयोग की जा रही है। यह सुरक्षित दवा है लेकिन जो पहले से कोई दवा ले रहे हैं उन्हें नुकसान पहुंचा सकती है। जहां तक दवा के प्रयोग की बात है तो देखा गया है कि इस दवाई के प्रयोग से वायरस की संख्या बढ़ाने की क्षमता कम हो जाती है। इसलिए ऐसा कहा गया है कि अगर डॉक्टर या संक्रमित परिवार को जो मरीज के सम्पर्क में रहते हैं उन्हें पहले ही दें तो संक्रमण नहीं होगा। या अगर होगा भी तो बहुत गम्भीर नहीं होगा। इस बार इसका दायरा बढ़ा दिया गया है। अब आवश्यक सेवा में लगे हुए कोरोना वॉरियर्स, सर्वे करने वाली टीम के सदस्यों को यह दवा दी जा सकती है। लेकिन जरूरी है कि बिना डॉक्टरी सलाह के यह दवा मत लें।


#7) क्या सैनेटाइजर से कैंसर जैसी बीमारी हो सकती है?
नहीं, अगर 70 फीसदी अल्कोहल वाले सैनेटाइजर प्रयोग करते हैं तो इससे नुकसान नहीं है। न ही अभी तक ऐसी कोई बात सामने आई है। यह हाथ से थोड़ी देर में उड़ जाता है। फिर भी हमेशा कहा जाता है कि जहां तक संभव हो खाना खाने से पहले या जहां पानी उपलब्ध हो वहां साबुन से ही हाथ धोएं।


#8) क्या कोरोना से ठीक हो चुके लोग, दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं?
जो भी कोरोना से संक्रमित हैं या जो ठीक हो चुके हैं उन्हें सपोर्ट करने की जरूरत है। यह ऐसा रोग नहीं है जो किसी की कॉलोनी में रहता है तो वहां रहने वाले सभी में हो जाएगा। इस समय सभी को मानसिक सहयोग की जरूरत है। जो लोग ठीक हो गए हैं उनके अंदर एंटीबॉडी बन जाती है और उसका प्रयोग करके दूसरे लोगों को ठीक किया जा रहा है। इसलिए ऐसे लोगों के ठीक होने के बाद उनसे कोई खतरा नहीं है लेकिन आगे भी सावधानी रखनी है।


#9) होम क्वारैंटाइन में क्या सावधानी बरतनी है और यह आइसोलेशन से कैसे अलग है?
क्वारैंटाइन उन लोगों को करते हैं जो कोविड-19 से संक्रमित लोगों के सम्पर्क में आए हैं और संक्रमण का खतरा है लेकिन हुआ नहीं है। आइसोलेशन में उन लोगों को रखा जाता है जो संक्रमित हो चुके हैं। इनको पहले अस्पताल में रखते थे। अब जिन मरीजों में कम लक्षण होते हैं उनहें होम क्वारैंटाइन किया जाता है। इसमें इंसान को अलग कमरे में रहना चाहिए। बाथरूम भी अलग प्रयोग करें। अगर ऐसा नहीं कर सकते तो हाथ धोने के बाद ही बाथरूम का इस्तेमाल करें। बर्तन भी अलग धुलें और बुजुर्ग-बच्चों को अलग रखें।


#10) देश में कोविड-19 की मौजूदा स्थिति को कैसे देखते हैं?
दूसरे देशों की तुलना में देश में कोरोना के मामलों की रफ्तार कम है लेकिन ये नहीं कह सकते कि मामले घट रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि बाहर जा रहे हैं तो पूरा ध्यान रखें तभी मामलों को कम किया जा सकता है। हालांकि देश में लोगों के ठीक होने का प्रतिशत भी बढ़ रहा है।



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