न्यूयॉर्क टाइम्स से / कोरोना और लॉकडाउन के चलते बच्चों में तनाव बढ़ रहा है, इससे उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को खतरा

न्यूयॉर्क टाइम्स से / कोरोना और लॉकडाउन के चलते बच्चों में तनाव बढ़ रहा है, इससे उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को खतरा





यहां पैरेंट्स और बच्चों को पार्क में जाने की छूट दी गई है। लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग के लिए निश्चित दूरी पर गोले बनाए गए हैं।






  • कुछ बच्चों में डेली रूटीन में बदलाव के चलते भी इसका असर देखा जा रहा 

  • डॉक्टर की सलाह- बच्चों को डराने के बजाय उन्हें नए अवसरों के बारे में बताएं


स्टेसी स्टाइनबर्ग. कोरोनावायरस से लड़ने के लिए इस समय दुनियाभर के तमाम देशों में लॉकडाउन चल रहा है। लोग अपने घरों में बंद हैं। हर घर में बस कोरोनावायरस को लेकर ही बातें हो रही हैं। ऐसे में बच्चों के मन में नकारात्मक विचार आना स्वाभाविक है। धीरे-धीरे यह तनाव गहरे अवसाद का रूप ले सकता है। बच्चे अलग-अलग तरह की एक्टिविटीज करने लगते हैं। इसे आमतौर पर पैरेंट्स समझ नहीं पाते हैं।


तनाव के चलते हार्मोन में बदलाव होता है


कैलिफोर्निया के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नादिन बर्क हैरिस कहते हैं कि तनाव के चलते हार्मोन में बदलाव होता है। कुछ बच्चों में डेली रूटीन में बदलाव के चलते भी इसका असर देखा जा रहा है। लेकिन कुछ मामलों में तनावपूर्ण घटनाओं को देखने और सुनने के कारण बच्चों में तनाव बढ़ रहा है। साथ ही कोई दिनचर्या नहीं है, माता-पिता की नौकरी जा रही है और आर्थिक तंगी ऊपर से है। परिवार के किसी सदस्य के बीमार होने या मौत होने से भी बच्चों को गहरा आघात लगता है। 
बच्चों को डराने के बजाय पॉजिटिव रखें
डॉ. हैरिस कहते हैं कि कोविड-19 महामारी बच्चों के मानसिक, शारीरिक स्वास्थ्य और व्यवहार को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने के लिए तूफान की तरह काम कर रहा है। ऐसे परिस्थिति में बच्चों के तनाव को कम करने और नकारात्मकता को दूर करने के लिए किस तरह बचाव करें? उन्हें मानसिक आघात न पहुंचे, इसके लिए एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चों को डराने के बजाय उन्हें नए अवसरों को बताने पर जोर दिया जाना चाहिए। 


बच्चों में तनाव को गहरे अवसाद में बदलने से रोकने के लिए इन बातों का ध्यान रखना होगा- 


बच्चों को करीब से जानने की कोशिश करें-



  • बच्चे के मन की बातों को जानने के लिए आप उनसे बात करें। यह जानने की कोशिश करें कि उन्हें कौन सी बातें परेशान कर रही हैं। शायद, ऐसा करने से उन्हें मदद मिल सके। 

  • अपने बच्चे में आत्मसम्मान की भावनाएं बनाएं। उसे प्रोत्साहन और स्नेह दें। ऐसी परिस्थितियों में अपने बच्चे को उन चीजों में शामिल करें जहां वह सफल हो सकता है। सजा के बदले उसे पुरस्कार दें। 

  • डॉ. नादिन बर्क हैरिस के मुताबिक, यदि आप बच्चे में तनाव देखते हैं और वह सामान्य नहीं है तो डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं। इस वक्त आपको टेलीमेडिसिन के माध्यम से परामर्श लेना चाहिए।


बच्चों पर विपरीत परिस्थितियों के प्रभाव को समझें



  • कई बच्चे इस समय तनावपूर्ण स्थिति का सामना कर रहे हैं। जो बच्चे बचपन से ही पॉजिटिव माहौल में रहे हैं, उनके सामने इस समय कोरोना संकट एक भयानक नकारात्मक घटना है। 

  • इस तरह की घटनाओं से बच्चों में हमेशा तनाव पैदा होने का खतरा बना रहता है। डॉ. बर्क हैरिस कहते हैं यह जानकर कि कोविड-19 के चलते तनाव खतरा ज्यादा है, ऐसे में बच्चों पर पड़ रहे प्रभाव को समझना जरूरी है।

  • पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफेसर यो जैक्सन, जो चाइल्ड माल्ट्रीटमेंट सॉल्यूशंस नेटवर्क के एसोसिएट डायरेक्टर के रूप में भी काम करते हैं। उनका कहना है कि ज्यादा जोखिम वाले घरों के बच्चे अभी अधिक पीड़ित हैं। फिलहाल उपलब्ध संसाधनों की कमी के कारण भी बच्चों में तनाव पैदा हो रहे हैं।


किसी भी तरह की धारणा बनाने से बचें



  • इस समय जब स्कूल बंद हैं, बच्चे घरों में बंद हैं। ऐसे समय में उनके दिमाग में कई तरह की धारणाएं बनती हैं। पैरेंट्स को इस पर नजर रखना चाहिए। पैरेंट्स के लिए अपने बच्चे को अधिक विश्वास दिलाने के लिए सबसे अच्छा तरीका है एक अच्छा श्रोता बन जाना। 

  • पैरेंट्स को बच्चों की बातों और आशंकाओं काे सुनना चाहिए, लेकिन उनकी आलोचना नहीं करनी चाहिए। आप उन्हें बिना किसी दखल के ज्यादा से ज्यादा सुनें। इससे उनमें एक भावना का विकास होगा कि उन्हें सुना जा रहा है, फिर वे अपने मन की हर बात व्यक्त कर पाएंगे।


तनाव की वजह पता करने की कोशिश करें



  • डॉ. हैरिस कहते हैं कि नींद, व्यायाम और हेल्दी फूड भी बच्चों में तनाव को नियंत्रण में रखने में मदद कर सकते हैं। पैरेंट्स को बच्चों से महामारी के बारे में बात करने से बचना चाहिए। 

  • डॉ. हैरिस पैरेंट्स को सलाह देते हैं कि वे अपने बच्चों को उनके दोस्तों से जोड़े रखें। यह वीडियो चैट, फोन कॉल और लेटर के माध्यम से किया जा सकता है। बच्चों की एक दिनचर्या बनाएं। उनके लिए खेलने का समय, स्वच्छता, फूड, पढ़ाई, व्यायाम का समय तय करें।



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