लक्ष्मी पंधे : टीवी अभिनेत्री, जो घर चलाने के लिए रिक्शा भी चलाती है!


कॉलम : मिसाल

- अनु अनंत 
28 साल की ल?की, ऐक्टिंग बचपन से ही उसका सपना है, लेकिन वह कहां कोई स्टार किड है, जो उसे आसानी से ब्रेक मिल जाएगा. न तो उसके पास कोई गॉडफ़ादर है न ही बॉलिवुड वाला लुक, लेकिन फिर भी अपने सपने को साकार करने में कोई कसर नहीं छो?ती. मॉडलिंग का सपना देखती है, पर उसके पास पोर्टफ़ोलियो पर ख़र्च करने के लिए लाखों रुपए नहीं हैं. उसने मु_ी में एक ख़्वाब सजा रखा है, लेकिन बहुतों की तरह वह किसी गफ़लत में नहीं है कि कोई आएगा और उसे शहज़ादी बनाकर फ़िल्मों में ब्रेक दे देगा. उसने अपनी राह ख़ुद ही चुनी है. ऐक्टिंग के सपने और शौक़ के साथ वह यह नहीं भूली है कि उसे अपने परिवार के लिए जीविका भी जुटानी है. चार बहनों वाले घर में वह पैसे कमानेवाली अकेली महिला है. यहां बात हो रही है लक्ष्मी निवृत्ती पंधे की, जो अपने सपने की सौदागरी के लिए अभिनय करती हैं और परिवार के पालन-पोषण के लिए ऑटो रिक्शा चलाती हैं.  मुंबई के उत्तरी छोर पर बसे उपनगर मुलुंड और ठाणे के बीच के एक इलाक़े में रहनेवाली लक्ष्मी को अभी कुछ दिनों पहले तक कोई नहीं जानता था. लेकिन मशहूर अभिनेता बोमन ईरानी ने जब सोशल मीडिया पर लक्ष्मी के साथ अपना एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि लक्ष्मी मराठी सीरियल्स में अभिनय करती हैं और बाक़ी वक़्त में ऑटो चलाकर अपने परिवार के भरण-पोषण में सशक्त भूमिका निभा रही हैं तो अचानक लक्ष्मी की चर्चा शुरू हो गई. ऐसा नहीं था कि बोमन ईरानी इससे पहले लक्ष्मी को जानते थे. उस दिन बोमन भी मुंबई के फ़िल्मसिटी स्टूडियो से अपनी किसी फ़िल्म की शूटिंग कर घर लौट रहे थे और लक्ष्मी भी अपनी कुछ को-स्टार्स के रूप में काम करने वाली ल?कियों के साथ घर जा रही थीं. वहीं अचानक बोमन ईरानी से मुलाक़ात हो गई. इस बारे में लक्ष्मी बताती हैं,''बोमन सर के बारे में सुना था कि बहुत अच्छे आदमी हैं. उस दिन देख भी लिया. हम कुछ ल?कियां शूट के बाद स्टूडियो से घर जा रहे थे. तो मैंने देखा बोमन सर अपनी कार से हमारा वीडियो ले रहे थे. वह अपनी बीएमडब्ल्यू से नीचे उतरे और मेरे पास आए और बोले चलो एक राउंड लगाते हैं. मैं उन्हें देखकर उत्साहित हो गई और उनके पैर छूने लगी तो बोमन सर ने कहा कि मेरे पैर मत छूओ. दरअस्ल, बोमन मुझे छोटा नहीं दिखाना चाहते थे. इसलिए उन्होंने ऐसा किया. उन्होंने मेरे साथ फ़ोटो ली और ख़ुश होकर मेरी तारीफ़ करके गए. मुझे तो विश्वास नहीं हो रहा था कि वह मेरे साथ थे. उनके जैसे इंसान होते कहां हैं.ÓÓ लक्ष्मी के पिता जब वह छोटी थीं तभी गुजऱ गए थे. परिवार की खस्ताहाल आर्थिक स्थिति के कारण लक्ष्मी अपनी प?ाई नहीं पूरी कर पाई थीं. किसी तरह आठवीं तक ही प?ाई पूरी की. उनकी चार बहनें हैं, जिनमें से एक को लकवा मार गया है. उनकी दो बहनों की शादी हो चुकी है. फ़िलहाल उनपर एक बहन और मां की देखभाल की ज़िम्मेदारी है, यही वजह है कि उन्होंने ऑटो रिक्शा चलाने के बारे में सोचा. पहले तो आसपास के लोग मज़ाक उ?ाते थे, लेकिन कुछ लोगों ने सपोर्ट भी किया. लक्ष्मी ने ड्राइविंग सीखी और फिर अभी मुलुंड स्टेशन से वैशाली नगर के बीच शेयरिंग ऑटो चलाती हैं. वह कहती हैं कि ऐसी तो कई महिलाएं हैं जो ऑटो चलाती हैं. ड्राइविंग की डगर उनके लिए आसान नहीं थी. पहले उनकी हथेली में दर्द होने लगता था, पर अब वह मास्टर हो गई हैं. अपने बचपन के सपने यानी ऐक्टिंग के बारे में लक्ष्मी कहती हैं,''मैं हमेशा से अभिनय करना चाहती थी. लेकिन लीड रोल तो मुझे मिलने से रहे इसलिए मैं साइड रोल भी कर लेती हूं. मराठी के कई शोज़ में मुझे कभी प्रेग्नेंट वुमन, कभी पागल, कभी किसान की बीवी, कभी मेड और ऐसे कई स्पेशल अपीयरेंस भी मिलते हैं.ÓÓ लक्ष्मी का मानना है कि उनकी शक्ल हीरोइनों वाली तो है नहीं जो लीड मिलेंगे. ''फिर लीड के लिए जिस तरह से कास्टिंग की लोग बातें करते हैं और कॉम्प्रोमाइज़ के लिए कहते हैं मैं उसके लिए तैयार नहीं हूं. मैं इस तरह ही काम करके ख़ुश हूं. ख़ुद की मेहनत से जो कर रही हूं, उसी से संतुष्ट हूं.ÓÓ
लक्ष्मी को सीरियल वगैरह में काम करने के एवज में तीन-चार दिनों के बाद पैसे मिलते हैं. वहीं ऑटो चलाकर एक दिन में 800 से हज़ार कमा लेती हैं. लक्ष्मी अपनी पूरी बातचीत के दौरान हंसते-मुस्कुराते हुए ही बात कर रही थीं. उनके चेहरे की मुस्कान से इस बात का अनुमान लगाना मुश्क़िल था कि वह किसी ग़म में हैं. ग़म को अपनी ज़िंदादिगी से ख़ुशियों में बदलने का हुनर लक्ष्मी से सीखा जाना चाहिए. लक्ष्मी की बातों में एक आत्मविश्वास है. मानो जीवन के उतार-चढ़ाव से जल्दी हार मानने वालों को हौसला देकर कहती हों 'मुफ़लिसी को मारो गोली.Ó
जगजीत सिंह वह गाना लक्ष्मी पर बिल्कुल सटीक बैठता है
मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है
अगर हौसला है, तो फ़ासला क्या है।



 



 


 


 


 


 


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