दर्द भरा सफर / रोजी-रोटी छिनी तो पैदल निकले, पैरों में पड़े छाले, छलका दर्द, कहा- चप्पल की तरह हमारी जिंदगी भी लॉकडाउन ने रगड़ दी

दर्द भरा सफर / रोजी-रोटी छिनी तो पैदल निकले, पैरों में पड़े छाले, छलका दर्द, कहा- चप्पल की तरह हमारी जिंदगी भी लॉकडाउन ने रगड़ दी



 




  • कोलकाता निवासी कारीगर सिमरन शादियों में टेंट का महल बनाने और अन्य तरह के सजावट का काम करता है

  • सरकार ने अंतर जिला आवाजाही की छूट दी, हाइवे पर वाहनों की संख्या और रफ्तार दोनों बढ़ी



भरतपुर. राजस्थान में जयपुर-आगरा नेशनल हाइवे पर बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक अपने गांव जाने के लिए पैदल ही निकल पड़े हैं। इनकी बेबसी कहिए या हालात, अब तो ट्रक, टैंकर वाले भी बिना किराया लिए इन्हें जहां तक संभव हो सकता है, वहां तक लिफ्ट दे रहे हैं, ताकि ये अपने घर पहुंच सकें। भरतपुर में ऐसे ही एक श्रमिक ने बताया कि कोलकाता में उसकी पत्नी गर्भवती है। साथियों के घर वाले भी बेचैन हैं, इसलिए पैदल ही घर के लिए निकल गए हैं। चप्पल घिस गई है। बड़ा सा छेद निकल आया है। चप्पल की तरह हमारी जिंदगी भी लॉकडाउन ने रगड़ दी है।



शादियों में टेंट का महल बनाने वाले कारीगर सिमरन की चप्पलें घिस गईं


कोलकाता निवासी सिमरन टेंट कारीगर है। वह शादियों में टेंट का महल बनाने के साथ ही सजावट का काम करता है। वहीं, खुद और उसके साथी अजय, संदीप, विजय, राकेश, किशन, सिरोज आदि अजमेर में एक बड़े ठेकेदार के यहां काम के लिए मार्च में आए थे, क्योंकि अप्रैल से शादियों का सीजन था, लेकिन कुछ काम ही कर पाए कि लॉकडाउन हो गया। शादियां कैंसिल होने लगी तो ठेकेदार ने भी काम रुकवा दिया, इसलिए खर्चा मिलना भी बंद हो गया। सिमरन ने बताया कि उसे खुद से ज्यादा चिंता कोलकाता में रही पत्नी की है, जो गर्भवती है। साथियों के घर वाले भी बेचैन है, इसलिए हम सबने निर्णय लिया कि कोई साधन नहीं मिल रहा है तो पैदल ही घर निकला जाए। पांच दिन के सफर में कभी पैदल तो कभी किसी वाहन का आसरा मिल जाता है तो आगे बढ़ रहे हैं। अब चप्पलें भी घिस गई हैं। बड़ा सा छेद निकल आया है। चप्पल की तरह हमारी जिंदगी भी लॉकडाउन ने रगड़ दी है।


आधा बीघा खेत और मजदूरी से कर लेंगे जीवनयापन


मप्र के महू निवासी अभिषेक, विजय व सूरज मथुरा में जैविक खाद बनाने की कंपनी में काम करते हैं। अभिषेक ने बताया आगरा होकर जाना था, लेकिन हॉटस्पॉट होने के कारण वहां से जाने नहीं दिया। एक वाहन में बैठ कर भरतपुर आ गए। धौलपुर होकर निकलेंगे। अभिषेक ने बताया कि अब लौट कर कभी यहां नहीं आएंगे। गांव में आधा बीघा खेत है। उसी में खेती और मजदूरी कर जिंदगी काट लेंगे।


आठ दिन में चले 240 किमी, अभी जाना है चित्रकूट


आबूरोड और अहमदाबाद की स्टील फैक्ट्री में काम करने वाले रंजीत एवं उसके साथी अनिल, गुड्डू और सोनू पिछले 8 दिन से लगातार चल रहे हैं। वे आबू रोड से चले हैं और उन्हें यूपी के चित्रकूट जाना है। रंजीत बताते हैं कि लॉकडाउन से 7 दिन पहले ही वे आबू रोड पहुंचे थे। अब पछतावा है कि गंगा घाट और तुलसीदास जी का दर छोड़कर अब पग-पग भटकर रहे हैं, लेकिन उम्मीद पर दुनिया कायम है। हम निश्चित रूप से अपने घर पहुंचेंगे। आज नहीं तो कल। इसी तरह सूरत से अरुण, रोहन और राम गोपाल पिछले 7 दिन से धौलपुर के लिए निकले हैं। भरतपुर पहुंच कर उन्होंने संतोष की सांस ली। बोले- अब तो घर पहुंचे ही समझो।


एक दिन में सेवर टोल प्लाजा से गुजरे 4 हजार वाहन
इधर, हाइवे पर अब वाहनों की संख्या और रफ्तार दोनों बढ़ गई हैं, क्योंकि सरकार ने अंतर जिला आवाजाही की छूट दे दी है। आज बड़ी संख्या में लोग वाहनों से अपने शहर, गांव और घरों को निकले। इस रूट पर पिछले 40 दिन से लगातार चल रहे वाहन चालक सुरेंद्रसिंह ने बताया कि आज अन्य दिनों की तुलना में वाहनों की संख्या करीब चौगुनी है। टोल प्लाजा के मैनेजर दीपक कुलश्रेष्ठ ने बताया कि अलसुबह से ही वाहनों खासकर दो पहिया वाहनों का निकलना शुरू हो गया था। इनमें अधिकांश लोग पिट़्ठू बैग टांगे हुए थे। यानी ये वे लोग थे, जो लॉकडाउन में फंसे थे, लेकिन सरकार ने जैसे ही अंतर जिला की मंजूरी दी तो घर से निकल पड़े। सोमवार को लगभग 4 हजार से ज्यादा वाहन निकले। इसी प्रकार पैदल चने वालों का भी सिलसिला जारी है। 



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