ये जागरूकता जरूरी / दंतेवाड़ा में मौत के दो दिन बाद गांव पहुंचा शव, सीधे ले गए श्मशान, मास्क-ग्लव्स पहनकर सिर्फ 10 लोग पहुंचे

ये जागरूकता जरूरी / दंतेवाड़ा में मौत के दो दिन बाद गांव पहुंचा शव, सीधे ले गए श्मशान, मास्क-ग्लव्स पहनकर सिर्फ 10 लोग पहुंचे



ये तस्वीर है बस्तर के आदिवासी गांव की है। यहां कोरोना को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के दौरान कोई पुलिस नहीं है। इसके बावजूद गांव के युवक की मौत होने पर उसके शव को घर तक लेकर नहीं गए। अंतिम संस्कार में भी परिवार के सिर्फ 10 लोग शामिल हुए।ये तस्वीर है बस्तर के आदिवासी गांव की है। यहां कोरोना को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के दौरान कोई पुलिस नहीं है। इसके बावजूद गांव के युवक की मौत होने पर उसके शव को घर तक लेकर नहीं गए। अंतिम संस्कार में भी परिवार के सिर्फ 10 लोग शामिल हुए।


बस्तर के इस गांव में ना पुलिस पहुंच रही, ना कोई रोकने वाला फिर भी जागरूकता




तेलंगाना गए गांव के एक युवक की बोरवेल गाड़ी के नीचे दबने से मौत हो गई थी



 


दंतेवाड़ा. कोरोना संक्रमण के बीच जब शहरों में लोगाें को समझाने के लिए पुलिस की सख्ती और डंडे चल रहे हैं। ऐसे में बस्तर के घोटपाल गांव के मुक्तिधाम की यह तस्वीर जागरूकता की मिसाल पेश करती है। गांव के एक युवक की मौत तेलंगाना में बोरवेल गाड़ी के नीचे दबने से हो गई थी। युवक का शव आया तो उसे घर ले जाने की जगह परिजन सीधे श्मशान घाट ले गए। अंतिम संस्कार में भी लोग ग्लव्स व मास्क पहनकर शामिल हुए।


दंतेवाड़ा के घोटपाल निवासी लक्ष्मण का शव मंगलवार को गीदम थाने लाया गया। यहां जरूरी प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद शव को गांव में महुआ पेड़ के नीचे कुछ देर के लिए रखा गया। फिर श्मशान घाट लेकर गए। अंतिम यात्रा में परिवार के ही गिनती के करीब 10 लोग मास्क और ग्लव्स पहनकर शामिल हुए। खास बात यह है कि आदिवासी बाहुल्य इस गांव में न पुलिस पहुंचती है न कोई रोकने वाला है।


पत्नी व मां-पिता ने बाहर ही किया दर्शन
लक्ष्मण तेलंगाना में बोरवेल गाड़ी में काम करता था। तीन महीने से घर नहीं लौटा था। चचेरे भाई समलूराम बताते हैं कि लक्ष्मण मार्च में घर आने वाला था। लॉकडाउन के कारण नहीं आ सका। क्या पता था सीधे उसका शव ही आएगा। शव जब गांव पहुंचा तो अंतिम बार घर भी नहीं ले जा सके। महुआ पेड़ के नीचे जब कुछ देर के लिए रखा तो मां-पिता व पत्नी ने वहीं आकर अंतिम दर्शन किया और बिलख पड़े।



 

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