शरीर में पानी की कमी---गंभीरता के लक्षण डॉ. अरविन्द प्रेमचंद जैन भोपाल 

(सामाजिक सरोकार )
शरीर में पानी की कमी---गंभीरता के लक्षण


डॉ. अरविन्द प्रेमचंद जैन भोपाल 


 



                          हमारा शरीर पांच महाभूतों से निर्मित हैं .दोष धातु और मल इन्ही पांच महाभूतों से ही बने हैं .पांच महाभूत यानी पृथ्वी ,जल, वायु, अग्नि,आकाश .जल द्रव्य की महत्ता हमारे जीवन में भी महत्वपूर्ण हैं .
                        द्रवस्निग्धशीत मंदमृदुपिच्छिलरसगुणबहुलान्यापयानी ,ताण्युपकलेदसनेहबंधविष्यंद मार्दव प्रह्लादकरानि. 
                         जलीय द्रव्य के लक्षण --- जिन द्रव्यों में द्रव ,स्निग्ध ,शीत मंद मृदु पिच्छिल और रस गुण की प्रधानता होती हैं उसे जलीय द्रव्य कहते हैं ,इनके सेवन से शरीर में गीलापन ,स्नेह ,बंध,विष्यंद मार्दव और प्रह्लाद उतपन्न करते हैं .
                         शरीर में पानी की कमी हो जाना या कहिए कि डिहाइड्रेशन हो जाने की समस्या जितनी आम है, इसका असर सेहत पर उतना ही बुरा होता है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि हम लोग इस समस्या को गंभीरता से नहीं लेते हैं।  जब शरीर में पानी की कमी होनी शुरू होती है तो शरीर कैसे संकेत देता है...
                       हमारा लगभग 70 प्रतिशत शरीर पानी से बना हुआ है। ऐसे में पानी हमारे लिए एक मूलभूत जरूरत ही नहीं बल्कि अपने शरीर को क्रियाशील रखने का तरीका भी है। गर्मी के मौसम में अक्सर ऐसा होता है, जब हमारे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इस कमी को ही मेडिकल की भाषा में डिहाइड्रेशन कहते हैं। यहां जानें जब डिहाइड्रेशन के प्रारंभिक लक्षण क्या होते हैं...
                        इन कामों में भी होता है पानी का उपयोग
                       -ऐसा नहीं है कि पानी सिर्फ हमारे शरीर में नमी बनाए रखने का काम करता है। बल्कि श्वसन क्रिया (ब्रीदिंग) और पाचन क्रिया (डायजेशन) भी पानी की मदद से ही संभव हो पाता है।
                         -अगर व्यक्ति को सही तरीके से और सही मात्रा में मूत्र त्याग (यूरिन) ना हो तब भी शरीर पर इसका बहुत बुरा असर पड़ता है। यानी हर शरीर से जुड़ी लगभग हर क्रिया के लिए हमारे शरीर को किसी ना किसी रूप में पानी की आवश्यकता होती है।
                           इन कारणों से होती है शरीर में पानी की कमी
                          -तेज गर्मी में वाष्पीकरण, पसीना आना, बार-बार यूरिन पास होना जैसी क्रियाओं के चलते शरीर को पानी अधिक मात्रा में चाहिए होता है। ऐसे में अगर शरीर में पानी की कमी हो और बुखार, उल्टी या डायरिया हो जाए शरीर डिहाइड्रेशन की गंभीर स्थिति में पहुंच सकता है।
                      -जब शरीर में पानी की कमी होनी शुरू होती है तो डिहाइड्रेशन के गंभीर स्तर तक पहुंचने से पहले ही हमें संकेत मिलने शुरू हो जाते हैं। हमारा शरीर किन तरीकों से हमें बताता है कि हमें अधिक लिक्विड लेने की जरूरत है, 
                   बड़ों में डिहाइड्रेशन के लक्षण
                   त्वचा: शरीर में पानी की कमी होने की स्थिति में हमारी स्किन ड्राई होने लगती है। हमारे होंठों पर पपड़ी यानी डेड स्किन जमने लगती है। स्थिति अधिक गंभीर होने पर होंठ फटने और ब्लड आने की दिक्कत भी हो जाती है।
                -स्किन पर रैशेज, खुजली और टाइटनेस की दिक्कत होने लगती है। मुलायम त्वचा अचानक से काफी सख्त महसूस होने लगती है।
                   यूरिन से जुड़ी समस्याएं
                  -यूरिन का रंग जितना अधिक हल्का और पानी जैसा होता है, उसका अर्थ होता है कि आपके शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा जा रही है। लेकिन अगर यूरिन का रंग हल्के पीले से लेकर गाढ़ा पीला है तो यह डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकता है।
                    -डिहाइड्रेशन होने का एक संकेत यह भी होता है कि पीला यूरिन आने के बाद आपको जलन या तेज खुजली की दिक्कत हो सकती है। डिहाइड्रेशन होने पर यूरिन की मात्रा भी कम हो जाती है।
                      सांस लेने में दिक्कत
                    -शरीर में पानी की कमी होने की स्थिति में व्यक्ति का मुंह और गला हर समय सूखा-सूखा रहता है। चेहरे की त्वचा में हर वक्त खिंचाव महसूस होता है। साथ ही मुंह से दुर्गंध आनी भी शुरू हो जाती है।
                    -ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सूखेपन के कारण मुंह में सलाइवा की प्रर्याप्त मात्रा नहीं बन पाती है, इस कारण मुंह में बड़ी संख्या में बैक्टीरिया पनप जाते हैं, जो मुंह से आनेवाली दुर्गंध का कारण बनते हैं।
                     अधिक भूख और प्यास लगना
                     -शरीर में पानी की कमी होने पर अधिक प्यास लगने की बात तो समझ आती है लेकिन ये भूख क्यों अधिक लगती है? हालांकि इस बारे में अभी तक पूर्ण शोध ना हो पाने के कारण कुछ अधिक नहीं कहा जा सकता है। लेकिन इतना जरूर है कि डिहाइड्रेट लोगों को नॉर्मल लोगों की तुलना में क्रेविंग अधिक होती है।
                     -डिहाइड्रेशन की स्थिति में व्यक्ति को पानी पीने के तुरंत बाद फिर से प्यास लगने लगती है। इस स्थिति से बचने के लिए बेहतर है कि आप सादा पानी पीने के बजाय, नींबू पानी, जल जीरा या इलैक्ट्रॉल घोल लें। इससे आपको तुरंत राहत मिलेगी।
                       थकान और सिरदर्द होना
                       -शरीर में पानी की कमी के कारण व्यक्ति हर समय खुद को थका हुआ महसूस करता है। थोड़ी-सी भी मेहनत करने के बाद उसका शरीर थकान से चूर हो जाता है।
                      -साथ ही पानी की कमी कारण कई बार शरीर में ब्लड प्रेशर लो होने की दिक्कत हो जाती है। इस कारण व्यक्ति को थकान, घबराहट, सिरदर्द और डेजिनेस ( हर समय नींद का अनुभव करना) की समस्या हो सकती है।
                      डिहाइड्रेशन का दिल पर असर
                       -कई बार डिहाइड्रेशन का असर हार्ट पर भी होता है। इस कारण व्यक्ति की धड़कने बहुत तेज हो जाती हैं। दिल में भारीपन महसूस हो सकता है और सांस की गति बढ़ सकती है।
                     -शरीर में पानी की कमी होने पर खून का प्रवाह बाधित होता है। इस कारण सभी अंगों तक सही मात्रा में ब्लड पहुंचाने के लिए हमारे दिल को पंपिंग के दौरान अधिक मेहनत करनी होती है, इस कारण दिल से जुड़ी दिक्कतें होने की आशंका बढ़ जाती है।
                      डिहाइड्रेशन का दिमाग पर असर
                      कई अलग-अलग शोध में यह बात साबित हो चुकी है कि डिहाइड्रेशन होने पर ब्रेन की काम करने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। हमारे देश में सदियों से जल को जीवन माना जाता है।
                      -आपको जानना चाहिए कि जिस तरह हमारी बॉडी का 70 प्रतिशत हिस्सा पानी है। वैसे ही अगर दिमाग की बात करें तो यह भी 70 प्रतिशत लिक्विड ही है।
                         -डिहाइड्रेशन की स्थिति में हमारा दिमाग किसी एक काम पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता है। हमें बेचैनी और छटपटाहट होने लगती है। यही वजह है कि जब हम पानी पीते हैं या लिक्विड डायट लेते हैं तो हमें असीम शांति का अहसास होता है।
                         इसीलिए हमारे देश की संस्कृति हैं की जब भी कोई मेहमान या स्वयं घर पर आते हैं तब परिवार जन सबसे पहले पानी से सत्कार करते हैं .पानी एक ऐसा द्रव्य हैं जो मानसिक शांति देता हैं .और ऐसे कहावत भी हैं की आपको जब गुस्सा आये तो कुछ देर मुंह में पानी भरकर बैठ जाये तो आपकी गुस्सा शांत हो जाती हैं .
                           पानी की महत्ता हमेशा से रही हैं पर हम लोगों ने पानी वायु अग्नि पृथ्वी और आकाश आदि का इतना अधिक दोहन किया हैं किभविष्य कितना जटिल होगा कह नहीं सकते .
                           पानी का सदुपयोग करे ,व्यर्थ पानी बर्बाद न करे ,जिस प्रकार जल विहीन होने से सृष्टि नीरस होने लगती हैं उसी प्रकार हमारा शरीर भी निस्तेज होने लगता हैं और हम संकटमय होने लगते हैं .
                             दुनिया में जल न होता तो हम जल रहे होते .
                      डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन, संरक्षक शाकाहार परिषद् A2 /104  पेसिफिक ब्लू, नियर डी मार्ट, होशंगाबाद रोड, भोपाल 462026  मोबाइल 09425006753


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