ऐसी मदद जरूरी है / कोरोना से ठीक हुए 2 मरीजों ने प्लाज्मा डोनेशन पर अनुभव शेयर किए, कहा- 45 मिनट लगते हैं, लेकिन इससे किसी की जिंदगी बच सकती है

ऐसी मदद जरूरी है / कोरोना से ठीक हुए 2 मरीजों ने प्लाज्मा डोनेशन पर अनुभव शेयर किए, कहा- 45 मिनट लगते हैं, लेकिन इससे किसी की जिंदगी बच सकती है




  • दिल्ली के तरबेज खान (बाएं) और अनुज शर्मा (दाएं)। दोनों को कोराना था। अब स्वस्थ हैं। इनका कहना है कि इंसानियत के लिए हमें प्लाज्मा दान करना चाहिए।दिल्ली के तरबेज खान (बाएं) और अनुज शर्मा (दाएं)। दोनों को कोराना था। अब स्वस्थ हैं। इनका कहना है कि इंसानियत के लिए हमें प्लाज्मा दान करना चाहिए।





  • दिल्ली के अनुज शर्मा ने बताया- इस प्रक्रिया में ज्यादा वक्त नहीं लगता, सिर्फ सुई लगने जैसा है 

  • तरबेज खान ने बताया कि मेरी मदद से किसी हिंदुस्तानी भाई की बीमारी ठीक होती है, तो यह फख्र की बात है

  • प्लाज्मा थैरेपी में कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के खून से संक्रमित मरीजों का इलाज किया जाता है




 



नई दिल्ली. कोरोना वायरस से ठीक हुए लोग अब ब्लड प्लाज्मा दान करने के लिए आगे आ रहे हैं। इनमें से एक पश्चिमी दिल्ली के मोती नगर के अनुज शर्मा और तरबेज खान शामिल हैं। दोनों को कोरोना था, लेकिन अब स्वस्थ हैं। अनुज ने बताया कि प्लाज्मा दान करने में ज्यादा वक्त नहीं लगता। सिर्फ सुई लगने जैसा है। हमें पूरी प्रक्रिया में 45 मिनट लगे। अगर प्लाज्मा डोनेशन से किसी की जान बचाई जा सकती है, तो हमें यह करना चाहिए।


इसी तरह तरबेज खान ने कहा, 'अगर मेरी मदद से किसी हिंदुस्तानी भाई की बीमारी ठीक होती है, तो इससे ज्यादा फख्र की बात नहीं है। मैंने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को प्लाज्मा थैरेपी के बारे में बताते सुना था। तभी मैं और मेरे परिवार ने प्लाज्मा डोनेट करना फैसला किया।'


लखनऊ और इंदौर में डॉक्टर ने प्लाज्मा डोनेट किया


लखनऊ के केजीएमयू में उरई की डॉक्टर को प्लाज्मा थैरेपी दी गई। लखनऊ की ही एक महिला डॉक्टर डोनर रहीं। वे अब स्वस्थ्य हैं और अपने घर लौट चुकी हैं। उधर, मध्यप्रदेश के इंदौर में श्री अरविंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में तीन गंभीर मरीजों को यह थैरेपी दी जा रही है। यहां भी कोरोना बीमारी से ठीक हो चुके दो डॉक्टर डोनर हैं।


केजरीवाल ने कहा था- प्लाज्मा थैरेपी उम्मीद की किरण
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पिछले दिनों कहा था कि दिल्ली में चार गंभीर मरीजों पर प्लाज्मा थैरेपी का परीक्षण किया गया। इनमें से दो को जल्दी छुट्टी मिल जाएगी। यह शुरुआती नतीजे हैं। ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि कोरोना का इलाज मिल गया है। लेकिन, उम्मीद की किरण है।


दिल्ली में प्लाज्मा थैरेपी से ठीक हुआ मरीज



  • दिल्ली के साकेत नगर स्थित मैक्स अस्पताल ने दावा किया कि उन्होंने प्लाज्मा थैरेपी की मदद से एक कोरोना संक्रमित को पूरी तरह ठीक करने में सफलता पाई है। 49 साल का यह मरीज 4 अप्रैल को कोरोना संक्रमित होने के बाद अस्पताल में भर्ती था। ठीक होने के बाद उसे 26 अप्रैल को छुट्‌टी दे दी गई। मैक्स हेल्थकेयर के ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर डॉ संदीप बुद्धिराजा ने बताया कि, "हम कह सकते हैं कि प्लाज्मा थैरेपी ने इस मरीज की रिकवरी को तेज करने में एक कैटेलिस्ट (उत्प्रेरक) का काम किया। हालांकि, हम इसका पूरा श्रेय प्लाज्मा थैरेपी को नहीं दे सकते, क्योंकि इम्युनिटी के साथ कई और भी फैक्टर हैं, जिनके कारण यह मरीज पूरी तरह ठीक हो पाया।

  • मैक्स अस्पताल के मुताबिक, मरीज का 14 अप्रैल की रात प्लाज्मा थैरेपी से इलाज किया गया और चौथे दिन हालत में सुधार होने के बाद वेंटिलेटर से हटा दिया गया। हालांकि, उसे ऑक्सीजन देना जारी रखा गया।  24 घंटे में मरीज की दो बार जांच की गई और सोमवार को मरीज की कोरोना रिपोर्ट दूसरी बार निगेटिव आई। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हालांकि अभी अगले 14 दिन उसे अपने घर में रहने की सलाह दी गई है।


कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के खून से संक्रमित मरीजों का इलाज किया जाता


प्लाज्मा थैरेपी में कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के खून से प्लाज्मा निकालकर संक्रमित मरीजों का इलाज किया जाता है। इस थैरेपी का इस्तेमाल चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका में किया जा रहा है। भारत में भी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने इस प्रयोग को मंजूरी दे दी है। यह थैरेपी दे रहे इंदौर के डॉ. सतीश जोशी ने प्लाज्मा थैरेपी के बारे में भास्कर को बताया।



  • क्या होता है प्लाज्मा: खून में चार चीजें होती हैं। रेड ब्लड सेल, व्हाइट ब्लड सेल, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा। यह प्लाज्मा खून का तरल हिस्सा होता है, जिसके जरिए एंटीबॉडी शरीर में घूमती हैं। यह एंटीबॉडी संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति के खून में मिलकर बीमारी से लड़ने में मदद करती है।

  • क्या है यह थैरेपी: कोरोना से पूरी तरह ठीक हुए लोगों के खून में एंटीबॉडीज बन जाती हैं, जो उसे संक्रमण को मात देने में मदद करती हैं। प्लाज्मा थैरेपी में यही एंटीबॉडीज, प्लाज्मा डोनर यानी संक्रमण को मात दे चुके व्यक्ति के खून से निकालकर संक्रमित व्यक्ति के शरीर में डाला जाता है। डोनर और संक्रमित का ब्लड ग्रुप एक होना चाहिए। प्लाज्मा चढ़ाने का काम विशेषज्ञों की निगरानी में किया जाता है।

  • कैसे निकालते हैं प्लाज्मा: कोरोना संक्रमण से ठीक हुआ व्यक्ति भी क्वारैंटाइन पीरियड खत्म होने के बाद प्लाज्मा डोनर बन सकता है। एक डोनर के खून से निकाले गए प्लाज्मा से दो व्यक्तियों का इलाज किया जा सकता है। एक बार में 200 मिलीग्राम प्लाज्मा चढ़ाते हैं। किसी डोनर से प्लाज्मा लेने के बाद माइनस 60 डिग्री पर, 1 साल तक स्टोर किया जा सकता है। दिल्ली में इसी थैरेपी से एक 49 वर्षीय संक्रमित तुलनात्मक रूप से जल्दी ठीक हो गया है।



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