कायम रहे भोपाल की पहचान, रेलवे दे ध्यान!


-उर्दू में अंकित किया जाए स्टेशन का नाम पूर्व में हमेशा उर्दू हिंदी इंग्लिश में लिखे होते थे शहर के नाम

 

भोपाल. नवाबों और अदब के शहर भोपाल की खास पहचानों में एक यहां की जुबान और भाषा भी है। पुरातन काल से पिछले कुछ सालों तक इस बात का अहतियात रखा जाता रहा है कि यहां बोलचाल की भाषा में उर्दू का इस्तेमाल किया जाए। कुछ समय पहले तक यहां ज्यादातर इलाकों में दुकानों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक पर उर्दू भाषा का उपयोग किया जाता रहा है। राजधानी भोपाल को मिलने वाली नई सौगात के रूप में प्लेटफार्म नंबर छह की बिल्डिंग का अभी अभी शुभारंभ हुआ है। पूरे प्रदेश और देशभर से आने वाले लोगों को इस बात का संदेश दिया जाना जरूरी है कि यहां अभी जुबान जिंदा है और लोग उसका अहतराम करते हैं। पर नव निर्माण बिल्डिंग से उर्दू ज़बान को दूर कर दिया गया है

जमीयत उलेमा मप्र के प्रवक्ता हाजी इमरान हारून ने रेलमंत्री, और अन्य जिम्मदारों को चि_ी लिखकर मांग की है कि भोपाल स्टेशन की इस नई बिल्डिंग पर दर्ज किए जाने वाले शहर के नाम में अंग्रेजी-हिंदी के अलावा उर्दू भाषा का भी इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ से भी इस बारे में मांग की है। हाजी इमरान ने कहा कि देश के कई बड़े शहरों में स्थित रेलवे स्टेशनों पर उर्दू भाषा में शहर का नाम अंकित है। और शहर भोपाल में भी हर स्टेशन बस स्टैंड एयर पोर्ट पर उर्दू भाषा मे भी शहर का नाम दर्शया जाता रहा है और धीरे धीरे उर्दू ज़बान को इन जगहों और शहर के बोर्डो से गायब किआ जा रहा है अफसोस उर्दू के साथ ये सौतेला वेयवार क्यों स्कूलों कालेजो से उर्दू शिक्षक गयाब और बाज़ारो से उर्दू पाठ्यक्रमों की पुस्तकें गयाब अब शहर के बोर्डो से भी उर्दू गयाब  इस लिहाज से  भोपाल में पूर्व की तरहां उर्दू ज़बान को बरक़रार रखा जाए रेलवे स्टेशन एयरपोर्ट बस स्टेंड और शहर के बोर्डो में उर्दू ज़बान को शामिल किया जाना चाहिए ताकि शहर की संस्कृति और यहां की उर्दू जुबान कायम रह सके।


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