बाढ़ प्रभावित पीडि़तों के बिजली बिल होंगे माफ : कमलनाथ


-दो लाख रुपए तक का कर्ज भी माफ होगा
- क्षतिग्रस्त मकान के लिए डेढ़ लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी
- नीमच व मंदसौर के बाढ़ पीडि़तों से मिले मुख्यमंत्री

नीमच/ मंदसौर। प्रदेश में सबसे अधिक बाढ़ का प्रभाव मंदसौर और नीचम जिले में देखने को मिला है। सोमवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यहां का दौरा किया। उन्होंने बाढ़ पीडि़तों से मिलने के बाद उन्हें बड़ी राहत दी है। बाढ़ प्रभावित पीडि़तों के बिजली बिल माफ करने की घोषणा की है। यही नहीं उन्होंंने दो लाख तक का कर्ज भी माफ करने का ऐलान किया है। सरकार ने ऐलान किया है कि बारिश की वजह से जिनके मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं उन्हें सरकार की ओर से डेढ़ लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा उनके पशु चराने की व्यवस्था भी सरकार की ओर से की जाएगी। अगले 15 अक्टूबर तक हर प्रभावित को मदद दे दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रभावितों के साथ है। उन्होंने बताया कि बाढ़ की विभीषिका के दौरान वे हर घंटे की स्थिति की जानकारी ले रहे थे और जिला प्रशासन से निरंतर संपर्क में थे। कमलनाथ ने कहा कि पीडि़तों को मुआवजा देने के साथ ही सड़के, पुल-पुलिया, शासकीय भवन और पीने के पानी सहित अन्य जो नुकसान हुआ है, उसके भी सुधार का काम तत्काल शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि व्यापारी और किसान की फसलों के नुकसान की भी पूरी भरपाई सरकार करेगी। उन्होंने संकट के समय में स्थानीय नागरिकों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने पीडि़तों की मदद करते हुए उन्हें राहत पहुंचाने के कार्य की सराहना की। इस अवसर पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रभावितों की मदद के लिए कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिन परिवारों के मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं, उसके लिए भानपुरा पंचायत से सात करोड़ रुपए दिए गए हैं। सभी रहवासियों को शुद्ध पानी मिले, हर घर में नल से पानी पहुंचे इसके लिए पांच करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए सरकार कोई भी कसर बाकी नहीं रखेगी। इधर, किसान आंदोलन के बाद सुस्त पड़ी मंदसौर की राजनीति में अब बाढ़ के बाद उफान आने लगा है। दो बार प्रभारी मंत्री हुकुमसिंह कराड़ा, दो बार पूर्व सीएम शिवराज व दिग्विजयसिंह आ गए। मंगलवार को कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया व राजस्व मंत्री गोविंदसिंह राजपूत भी आएंगे। 
पायाखेड़ी में पशुपालन विभाग बंटवा रहा भूसा
पायाखेड़ी की आबादी करीब 1200 है। लोगों का आरोप है कि यदि समय पर गांधीसागर डेम के गेट खोल दिए जाते तो चंबल का पानी उनका गांव बर्बाद नहीं करता। 12 फीट तक घरों में पानी भर गया, जिससे पूरा गांव डूब गया। कई पशु मर गए तो मकान मिट्टी में मिल गए, टू व्हीलर, ट्रैक्टर भी पानी में डूब गए। लोग पूरी रात डूबे हुए मकानों की छत पर बैठे रहे। जैसे-तैसे गांव के मछुआरों की नाव से लोगों ने एक-दूसरे की मदद कर अपनी बचाई।
बाढ़ के बाद 3 दिन तक नहीं आया कोई अधिकारी
गांव पीडि़त फकीर मोहम्मद ने बताया कि चंबल और शिवना नदी का पानी अचानक गांव में घुस आया। हमको पहले से किसी ने कोई सूचना भी नहीं दी थी। 3 दिन तक तो कोई अधिकारी देखने भी नहीं आया था। अब नेता राजनीति करने आ रहे हैं। राहत सामग्री भी पांचवें दिन मिली। अनवर खान ने कहा कि गांधीसागर डैम का लेवल कम होता तो पानी नहीं भर पाता, जब से डैम बना है तब से अभी तक कभी पानी नहीं भरा था। गांधीसागर डैम पर पदस्थ अधिकारियों ने पानी का लेवल कम नहीं किया, इससे गांव में पानी भर गया। पूरा गांव तबाह हो गया।


जिले के 18 हजार परिवार अब भी राशन के इंतजार में
राजस्व विभाग के अनुसार के बाढ़ प्रभावित लोगों को 50 किलो गेहूं के लिए पात्र माना है। सरकारी आकलन के मुताबिक 30 हजार मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि 12 हजार परिवारों को राशन बांट चुके हैं। यानी 18 हजार परिवारों को राशन नहीं मिला है। इस लिहाज से 18 हजार परिवार के करीब 80 हजार सदस्य अनाज से वंचित हैं। जिला मुख्यालय से 7 किमी दूर गांव अरनिया निजामुद्दीन के रामलाल अहिरवार ने बताया कि शुक्रवार को राशन दुकान पर पटवारी ने 20 से 15 किलो राशन ही दिया। इसके बाद दुकान को खोला ही नहीं गया।


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