ग्वालियर-चंबल अंचल में उपचुनाव ही तय करेंगे मध्य प्रदेश सरकार का भविष्य


ग्वालियर। कोरोना संकट के बीच ग्वालियर-चंबल अंचल में खेती-किसानी का काम समाप्त होने के साथ ही उपचुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो जाएगी। शहरी विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव की आहट सुनाई पडऩे लगी है। 15 साल प्रदेश में शासन करने के बाद ग्वालियर-चंबल अंचल ने ही चौथी बार सरकार बनाने में ग्वालियर-चंबल अंचल ने बैरिकेड्स लगा दिया था। एक बार फिर ग्वालियर-चंबल अंचल को तय करना है कि भोपाल में शिवराज सरकार रहेगी या फिर कमल नाथ सरकार की वापसी होगी। क्योंकि उपचुनाव में अंचल की 14 विधानसभा सीटों पर चुनाव होना हैं। इन 13 विधानसभा क्षेत्रों से चुने गए विधायकों के कारण ही कांग्रेस सरकार से बाहर हुई है।


कमलनाथ व दिग्विजय सिंह की जोड़ी 
कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती है-पहली महल से मुकाबला करना है, दूसरी उसके सामने भाजपा का बूथ तक मजबूत संगठन हैं। इन चुनौतियों के बीच कांग्रेस जातीय समीकरणों में जीत तलाश रही है।


जौरा को छोड़कर भाजपा के उम्मीदवार तय 
उपचुनाव के लिए जौरा विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर भाजपा के उम्मीदवार तय हैं। विधायकी के साथ कांग्रेस से त्यागपत्र देकर भाजपा में शामिल हुए पूर्व विधायकों को ही चुनाव मैदान में उतारना लगभग तय है। भाजपा के संभावित उम्मीदवारों ने चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। जौरा से स्वर्गीय विधायक बनवारी लाल शर्मा के परिवार का झुकाव सिंधिया की तरफ होने से जौरा से उम्मीदवार तय करने को लेकर भाजपा व कांग्रेस दोनों दुविधा में हैं।


भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती
भाजपा के सभी उम्मीदवार आयतित हैं। उम्मीदवारों व कार्यकर्ताओं के बीच सामजंस्य बैठाना बड़ी चुनौती है। इन विधानसभा क्षेत्रों से लंबे अरसे काम कर रहे नेता भी इन उम्मीदवारों का इमानदारी के साथ देंगे, या फिर औपचारिकता निभाएंगे। भाजपा रणनीतिकारों ने शिवराज सरकार को बचाने के लिए केंद्रीय व प्रदेश नेतृत्व ने पूरी ताकत लगाने की तैयारी कर ली है। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के संसदीय क्षेत्र का मुरैना जिला उपचुनाव में अहम फैसला करेगा।


कमलनाथ व दिग्विजय के भरोसे कांग्रेस
ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद कांग्रेस नेतृत्व के पास कोई चमत्कारी नेता नहीं है कि जो कि उम्मीदवारों को जीताने में उसके चेहरे का उपयोग अंचल में किया जा सके। कमलनाथ का क्षेत्र से कभी लगाव नहीं रहा है। सवा साल सीएम रहने के बाद वह कभी विमानतल से बाहर नहीं आए। महल की खिलाफत के कारण दिग्विजय सिंह की अंचल में अलग छवि हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी हाइकमान ने दिग्विजय सिंह को स्टार प्रचारक की बजाए नेताओं के बीच समन्वय बनाने का काम सौंपा था। दिग्विजय सिंह के 15 साल के शासन को अब भी लोग भूले नहीं हैं। कांग्रेस की दूसरी पंक्ति में अशोक सिंह व डॉ गोविंद सिंह हैं। अशोक सिंह खुद अपने सियासी करियर को स्थायीत्व देने के लिए संघर्ष के दौर में हैं। डॉ गोविंद सिंह लहार और भिंड तक ही सीमित रहे हैं। इसलिए उनकी मौजूदगी से कांग्रेस उम्मीदवार को कोई माइलेज मिलेगा। इसकी उम्मीद न के बराबर है। कुल मिलाकर उम्मीदवार का चेहरा ही उसे विजयश्री के द्वार तक पहुंचा सकता है। लॉकडाउन के बाद अभी कई समीकरण बदले जाने की संभावना जताई जा रही है।


इन पर दांव लगा सकती हैं कांग्रेस
-ग्वालियर विधानसभा: सुनील शर्मा का नाम पहले नंबर पर हैं। महल से जुड़े रहने के कारण राजा खेमा इन्हें पसंद नहीं कर रहा है। इसलिए संत कृपाल सिंह का नाम उछाला जा रहा है, जो कि दिग्विजय सिंह के नजदीकी हैं।
- पूर्व विधानसभा क्षेत्र: अशोक सिंह का नाम चर्चाओं में हैं। अशोक सिंह दिग्विजय सिंह के साथ कमल नाथ के नजदीकी भी हैं।लेकिन उपचुनाव में उनकी रुचि नहीं आ रही है। मितेंद्र सिंह दावेदारी कर रहे हैं। लेकिन अभी कांग्रेस उन पर दांव लगाने के मूड में नजर नहीं आ रही हैं। पूर्व से बाहरी उम्मीदवार को लाने की भी चर्चा है।
-डबरा: डबरा विधानसभा सीट पर भाजपा की लहर में भी कांग्रेस का कब्जा रहा है।बदली हुई परिस्थतियों में सत्यप्रकाश परसेडिय़ा के इकलौते नाम पर चर्चा है।
-पोहरी: यहां से पूर्व मंत्री रामनिवास रावत का नाम हैं। लेकिन धाकड़ बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण रामनिवास रावत चुनाव लडऩे से पीछे हट रहे हैं। रामनिवास रावत सिंधिया के नजदीकी रहे हैं। हरिवल्लभ शुक्ला का नाम पर विचार किया जा रहा है। धाकड़ों पर भी कांग्रेस की नजर है।
-मुरैना: दिनेश गुर्जर, राकेश मावई के नाम पर विचार किया जा रहा है। दिनेश गुर्जर कमल नाथ के नजदीकी है। परशुराम मु्दगल को भी टटोला जा रहा है।
-सुमावली: मानवेद्र गांधी के नाम पर विचार के अलाला कुशवाह उम्मीदवार की तलाश की जा रही है।
- मेहगांव: पूर्व मंत्री राकेश चौधरी दावेदारी कर रहे हैं। लेकिन उनका अतीत आड़े आ रहा है। यहां भी कांग्रेस के नए चेहरे की तलाश हैं। नया चेहरा तलाशने के जिम्मेदारी डॉ. गोविंद सिंह को सौंपी गई है।
-दिमनी व अंबाह में भी कांग्रेस वजनदार प्रत्याशी की तलाश कर रही है। रविंद्र सिंह व सत्यप्रकाश शाकवार का नाम भी चर्चाओं में हैं।
- गोहद : कांग्रेस आधा दर्जन से अधिक नामों पर विचार कर रही है।


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